जहां कुछ लोग जियारत गाहो को ग़लत बताते हैं। वहीं ये जियारत गाह अकीदतमंदों से भरी रहती है। ऐसी ही जियारत गाह की कहानी सुनाने जा रहे जो बीबी पाक दामन के नाम से प्रसिद्ध है।
क्या है घटना
ये 681ई के ज़माने लगभग 62हि के मध्य का। इस पृकार बयान किया गया है कि कदीम लाहौर के करीब जंगल के एक टीले पर कुछ परदेसी औरतों और मर्दों का आगमन होता है।उस जमाने में हिन्दू राजा महाबरन की हुकूमत थी। बस्ती में एक बड़ा मंदिर था ।इस मंदिर के आगे आग भी जलती थी।
एक दिन अचानक से मंदिर की मूर्तियां गिर गई और आग भी बुझ गई। ये सब बातें पुरोहित के सामने हुई थी। जब ये बात राजा को मालूम हुई तो उसने ज्योतिषो को बुलाया। ज्योतिष भी इस बात का मतलब नहीं बता पाए।इसी दौरान राजा को ये खबर मिली जंगल के करीब टीले पर कुछ परदेसी मर्दों और औरतों का आगमन हुआ है।
राजा ने अपने सैनिकों को इनको लाने को कहा।
कितने लोग थे।
इस टीले पर कुल 11लोग थे । जिनमें 7औरते 4आदमी थे। सिपाहियों को आते देख औरतों ने अपने चेहरे पर नकाब डाल ली ।और आदमियों ने अपनी तलवारे निकाल ली।
सिपाही इनके चेहरों की जलालत देखकर डर गये। उनमें से दो सिपाही दौड़ कर राजकुमार बिकृमासहाय को बुला लाये ।
राजकुमार ने आकर राजा का पैगाम सुनाया और साथ चलने को कहा।उन औरतों में से बुजुर्ग महिला ने जवाब दिया।हम खुदाए वाहिद के बंदे और पैगंबरे अरब की औलाद में से है। हमारे सरदार को जो रसूल का नवासा था। कर्बला में शहीद कर दिया गया।हम क़ैद से छूटकर मदीना पहुंचे मगर वहां भी हमें रहने न दिया गया मजबूरन हमें परदेस आना पड़ा । हमारी तरफ से तुम को कोई परेशानी नहीं होगी।मगर फिर भी तुम पसंद नहीं करते तो हम यहां से कहीं और चले जाते हैं"
वह खातून संस्कृत भाषा में बात कर रही थी।
राजकुमार हैरतजदा होकर सुन रहा था।
अपना और अपने साथ आए लोगों का परिचय दिया।
खातून ने बताया मैं मुस्लिम शहीद की बेवा रुकय्या बिन्ते अली हूं।
अलम्बरदार लश्करे कर्बला अबुल फ़ज़लिल अब्बास की बहन।
दूसरी पांच औरतों केबारे में बताया कि ये
अकील इब्ने अबितालिब की बेटियां हैं।
और 6वी खातून के बारे में बताया ये हलीमा है। कहने को तो कनीज हैं मगर रुतबे में हमारे बराबर ।फिर मर्दों के नाम बताए, अबुल फतह, अबुल फ़ज़ल, अबुल मकारिम, अब्दुल्ला ये हमारे कबीले से है और हमारी सुरक्षा केलिए हमारे साथ आए हैं।
राजकुमार इनकी बातों से बहुत पृभावित हुआ और नमृ भाषा में बोला। राजा के आदेश का पालन तो करना पड़ेगा। आपको दरबार चलना पड़ेगा। ये सुनकर खातून क्रोधित हो ग ई।
और गुस्से से राजकुमार की ओर देखा। राजकुमार सर से पांव तक कांपने लगा और बेहोश हो गया।
सिपाहियों ने ये देखकर चारों ओर से घेर लिया।
इतने में खातून ने दुआ के लिए हाथ उठाया और आसमान की ओर देखा। फिजा में हलचल मच गई।और जमीन उसी जगह पर फटी और बीबिया ऺऺ । और उनके रक्षक उसमें समा गये।
सिपाहीय्् बहुत आश्चर्यचकित हुए और राजा को होश में लाकर सब किस्सा बयान किया।
राजकुमार बहुत पृभावित हुआ।
राजकुमार पर इन सब बातों का इतना असर हुआ कि वही मुजाविर बनकर बैठ गया।
फिर ख्याल में बीबी से सवाल किए ।बीबी की आवाज ने इसे सबकुछ सिखाया।
और ये राजकुमार पाक बीबियो के मजार का पहला मुजाविर बना। राजकुमार के साथ बाकी सिपाही भी इस्लाम के दायरे में आ गये।
इन सब ने इसी जगह पर चबूतरा बना लिया। और यही बैठकर इबादत करने लगे।
बीबी की आवाज इनकी हादी (hidayat dene wala /wali ) थी।
इस पृकार से ये मोजिजा दूर दूर तक मशहूर हो गया ।और इस जगह से लोगो को शिफा मिलने लगी।
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